Homosexuality and Unnatural Sex Relations-14 : इलेक्ट्रोनिक सेक्स टॉयज ऑनलाइन शॉपिंग जोरों पर
इलेक्ट्रोनिक सेक्स टॉयज ऑनलाइन शॉपिंग जोरों पर
अप्राकतिक यौन संबंध बनाने हैं, लेकिन उन पर कानून का कड़ा पहरा लगा है। सेक्स करना है, लेकिन कोई पार्टनर नहीं मिल रहा। मनचाहे ढंग से जब चाहूं, जब तक चाहूं सेक्स करना चाहता हूं, लेकिन इसका कोई इंतजाम नहीं है। तो फिर ऐसे में क्या किया जाए? इन सभी प्रश्नों का उत्तर अब सेक्स मार्केट ने खोज लिया है। ऐसे ऐसे सेक्स टॉयज बाजार में आ गए हैं, जिनके साथ मनमाने ढंग से सेक्स किया जा सकता है तथा यौन आनंद लिया जा सकता है। इन सेक्स टॉयज से उन लोगों के जीवन में बहार आई है, जो अप्राकृतिक ढंग से या मनमाने तरीके से सेक्स करने के शौकीन हैं। लेकिन यह जान लेना भी बहुत जरूरी है कि भारत में सेक्स टॉयज बनाने और इसकी बिक्री करना गैर-कानूनी है तथा सजा का प्रावधान है। इसके बावजूद यहां सेक्स टॉयज खूब बिक रहे हैं तथा इनका व्यापार लगातार बढ़ता जा रहा है।
पुरुषों के लिए स्त्री की कद-काठी की ऐसी गुड़िया, जिस पर स्त्री के सभी अंग बने हुए हैं और जो देखने पर बिल्कुल स्त्री ही नजर आती है। इसे फोल्ड करके बैग में रखा जा सकता है और जब सेक्स की इच्छा हो तो बैग से निकालकर बेड पर लिटाया जा सकता है। इसके खूबसूरत लिबास को अलग करके इसके साथ बिल्कुल वैसे ही सेक्स किया जा सकता है, जैसे किसी स्त्री के साथ किया जा सकता है। इस गुड़िया से मुखमैथुन, योनी मैथुन और गुदा मैथुन किया जा सकता है। इसके अंग स्त्री की तरह ही चिकने और लुब्रिकेटिड हैं, ताकि सेक्स में चिकनाई बराबर बनी रहे। इस गुड़िया को मनमाने ढंग से लिटाया जा सकता है, उल्टा किया जा सकता है, बिठाया जा सकता है या जिस अवस्था में भी चाहो, स्थिति करके सेक्स किया जा सकता है।
जो लोग इस गुड़िया की कीमत अदा न कर पाएं, वे नकली योनी व गुदा भी खरीद सकते हैं। इन्हें एक निश्चित स्थान पर रखा जाता है तो वे वहां चिपक जाती हैं तथा सेक्स के दौरान अपने स्थान से नहीं हिलतीं। इनसे मनमाने ढंग से सेक्स किया जा सकता है। ये अंग इतने चिकने व लुब्रिकेटिड बनाए जाते हैं कि अहसास ही नहीं होता कि कृत्रिम सेक्स किया जा रहा है या वास्तविक।
स्त्रियों के लिए डिल्डो
स्त्रियों की यौन संतुष्टि के लिए सेक्स टॉयज में डिल्डो यानि कृत्रिम लिंग बनाए गए हैं। ये अलग-अलग साइजों में मिलते हैं। स्त्रियां मनमाना साइज खरीद सकती हैं। ये डिल्डो इस तरीके के बनाए जाते हैं कि योनी, गुदा या मुख में वास्तविक लिंग जैसा अहसास कराते हैं। समलैंगिक स्त्रियां इनका ज्यादा प्रयोग करती हैं तथा डिल्डो से अपनी पार्टनर को सेक्स संतुष्टि करवाती हैं। आजकल तो इस प्रकार के भी डिल्डो आए हुए हैं, जिनमें वीर्य जैसा पदार्थ भरा होता है। स्त्री द्वारा इसका एक बटन दबाए जाने पर यह वैसे ही उस पदार्थ को छोड़ता है, जिस तरह कोई लिंग वीर्य छोड़ता है।
इसके अलावा पुरुष की गुड्डे जैसी फुल बॉडी भी मिलती है, जिस पर पुरुष के सभी अंग बने होते हैं। एक बटन दबाने पर इस गुड्डे का लिंग तन जाता है तथा स्त्री इससे मनमाने तरीके से सेक्स कर सकती है। अप्राकृतिक यौन संबंधों के शौकीन इन सेक्स टॉयज का जमकर इस्तेमाल करते हैं।
आजकल इलेक्ट्रोनिक सेक्स टॉयज का भी प्रचलन बढ़ रहा है। ये टॉयज निर्र्जीव नहीं होते तथा इनमें एक विशेष प्रकार की वायबरेशन रहती है, जो उतेजना को बढ़ाती है।
लगातार बढ़ रही है मांग
अधिकांश पश्चिमी देशों में इन सेक्स टॉयज के बाकायदा स्टोर बने हुए हैं। लेकिन भारत में इनकी बिक्री खुलेआम न होकर ढंके-छिपे अंदाज में तथा बड़े शहरों में ही हो रही है। इसके बावजूद सच्चाई यह है कि सेक्स टॉयज की यहां तेजी से मांग बढ़ रही है।
हाल ही में कुछ मैट्रो सिटिज में एक सर्वे करवाया गया, जिसमें पाया गया कि करीब 20 प्रतिशत पुरुष व 13 फीसदी महिलाएं सेक्स टॉयज में रुचि रखती हैं। बड़ी बात यह है कि कोई भी भारतीय कंपनी ऐसे सामान नहीं बना रही है, बल्कि यह सारा सामान विदेशों से आयात होता है। भारत में सबसे ज्यादा सेक्स टॉयज चीन से मंगाए जाते हैं। इनकी सबसे ज्यादा ऑनलाइन खरीददारी होती हैं।
कंडोम बनाने वाली एक कंपनी की रिपोर्ट के मुताबिक भारत के बड़े शहरों में 15 प्रतिशत महिलाएं आर्गेनिक सेक्स टॉयज का इस्तेमाल करती हैं। ये एक खास प्लास्टिक के बने होते हैं तथा मानव अंग जैसे होते हैं। हालांकि चिकित्सा से जुड़े लोग इसके इस्तेमाल को गलत नहीं ठहराते हैं। उनका कहना है कि कुछ लोग घरेलू चीजों का अप्राकृतिक इस्तेमाल करते हंैं जो कि काफी खतरनाक हो सकता है। मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक सेक्स में असंतुष्टि की वजह से होने वाले तनाव को कम करने में सैक्स टॉयज कारगर साबित हो सकते हैं। इनका इस्तेमाल करने में युवा पीढ़ी बहुत आगे है।
एक मार्केट रिसर्च के मुताबिक भारतीय सेक्स खिलौना बाजार 35 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। साथ ही बताया गया है कि भारत में सेक्स से जुडे सामानों का कारोबार वर्ष में 8700 करोड़ रूपए का है। वहीं पूरे विश्व में यह सेक्स खिलौनों का कारोबार लगभग 15 करोड़ डॉलर का है जो कि 30 फीसद की दर से बढ़ रहा है। इसमें कई बड़ी कंपनियों ने रूचि दिखाई है। अब कंपनियां अपने नए-नए उत्पाद बाजार में उतार रही हैं। हाल ही में एक कंपनी द्वारा भी मार्केट सर्वे करवाया गया था जिसमें सामने निकलकर आया है कि सेक्स खिलौने, सेक्स से जुड़े उपकरर् िऔर ऐसे ही दूसरे सामनों की बहुत ज्यादा मांग है। सेक्स से जुड़े सामान देश के बड़े शहरों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होते हैं और इनकी बिक्री भी सबसे ज्यादा होती है।
होता है गुप्त शब्दों का प्रयोग
सेक्स टॉयज खरीदने व बेचने वाले गुप्त शब्दों का प्रयोग करते हैं ताकि दूसरा कोई उन्हें न समझे। पिछले दिनों चोखा, पाऊ व गेलोरी जेसे शब्द दिल्ली के दुकानदारों ने सेक्स टॉयज खरीदने व बेचने के लिए प्रयोग किए। इसका खुलासा तब हुआ, जब पुलिस ने पालिका बाजार से आशीष गुप्ता नामक व्यक्ति को गिरफ्तार करके पूछताछ की। इस व्यक्ति के विभिन्न प्रकार के 21 इलेक्ट्रोनिक सेक्स टॉयज, कामोतेजक दवाएं, अश्लील फिल्में व आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई।
ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए और पुलिस से बचने के लिए आशीष कोड भाषा का उपयोग करता था। आशीष अपने ग्राहकों को चोखा मतलब अच्छा कहकर बुलाता। वह पुरूष ग्राहकों को पाऊ व महिला ग्राहकों को पोनी कोड शब्द से बुलाता था। किसी तरह की परेशानी होने पर वह गेलोरी शब्द का कोड उपयोग करता। पुलिस को दिए बयान में उसने बताया कि पुरुष अंगों के लिए वह अकेल राम तथा महिला अंगों के लिए लेवेड़ी कोड का उपयाग करता। इसी तरह वह अश्लील फिल्म के लिए टीआर तथा बड़े उपकरर् िके लिए लंगतार कोड का इस्तेमाल करता था। आशीष ने पुलिस को बताया कि अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने वालों में सेक्स टॉयज की भारी मांग है। सेम सेक्स का व्यक्ति न मिलने पर वे सेक्स टॉयज का प्रयोग करते हैं। उसने यह भी बताया कि उसके पास महिलाएं भी सेक्स टॉयज खरीदने के लिए आती हैं। लेकिन केवल वही महिलाएं आती हैं, जो किसी पुरानी खरीददार का रेफरेंस लेकर आती हैं।
भारत में प्यूर, प्रीमियम बॉडीवियर, शुंगा, एलेगेंट मोमेंट्स के साथ-साथ मेल बेसिक्स, वाइब्रेटर, डिल्डो और फेटिश क्लॉथ्स की बिक्री सबसे ज्यादा होती है। महिलाएं ऐसे सेक्स टॉयज की मांग करती हैं, जिनमें लोशन, एरोटिक लॉन्जिरी और लुब्रीकेंट्स बहुत ज्यादा हो ताकि ईजी सेक्स हो सके। युवा पीढ़ी में किस को मजेदार बनाने वाली लिप-बाम, एडिबल इनर वियर और फन अंडरवियर काफी लोकप्रिय है। इनके अलावा पॉर्न फिल्में, उत्तेजक स्प्रे, उत्तेजक दवाइयां और उत्तेजक चिंगम की मांग भी काफी बढ़ रही है।
ऑनलाइन शॉपिंग जोरों पर
हमारा देश कामसूत्र देश है, जिसमें सेक्स एक विवादित विषय है तथा जिस पर खुलकर बात करने से भी लोग परहेज करते हैं। यहां कंडोम फैमिली प्लानिंग का एक टूल है, लेकिन वाइब्रेटर वाला कंडोम सेक्स टॉयज की कैटिगरी में आ जाता है। वहीं सेक्स टॉयज, जो भारतीय कानूनों के तहत गैरकानूनी माने जाते हंैं, इंटरनेट पर ऑनलाइन शॉपिंग के जरिये आसानी से पहुंच में आ चुके हैं। इसके लिए कमजोर कानूनों का हवाला दें या फिर इंटरनेट की दुनिया में मॉनिटरिंग की कमी का, सेक्स और इससे जुड़े प्रॉडक्ट्स को ओपन मार्केट में खरीदने के बजाय ऑनलाइन हासिल करना आज ज्यादा मुफीद हो चला है।
पहले और अब
अभी तक सेक्स से जुड़े प्रॉडक्ट्स मसलन जेल, कैप्सूल्स, स्प्रे वगैरह केमिस्ट की शॉप पर ही उपलब्ध होते थे, लेकिन हाल-फिलहाल में कई ऑनलाइन वेबसाइट्स मशहूर हो चली हैं, जो इन प्रॉडक्ट्स के अलावा कुछ खास आइटम्स भी बेच रही हैं। इन साइट्स पर लॉन्जरी और नॉर्मल सेक्स प्रॉडक्ट्स के साथ कुछ बैटरी ऑपरेटेड डिवाइस, वाइब्रेटर्स और लेटेक्स डॉल बेची जा रही हंैं, जो करीब-करीब या पूरी तरह से सेक्स टॉयज की श्रेर्ीि में ही आते हैं। चूंकि सेक्स टॉयज की कोई सर्वमान्य परिभाषा नहीं गढ़ी गई है, इसलिए ऑनलाइन रिटेलर इन्हें कॉस्मेटिक प्रॉडक्ट्स या हेल्थ प्रॉडक्ट्स बताकर बेच रहे हैं। इन साइट्स पर दर्ज हेल्पलाइन नंबरों पर जब इन प्रॉडक्ट्स के लीगल स्टेटस की जानकारी मांगी जाती है, तो बताया जाता है कि ये सेक्स टॉयज नहीं, बल्कि हेल्थ या कॉस्मेटिक प्रॉडक्ट्स हैं।
प्रॉडक्ट्स कैसे-कैसे
सेक्स टॉयज में मस्टरबेटर, वाइब्रेटर, लेटेक्स डॉल्स, इनहैंसर, एडिबल अंडरगारमेंट्स, पेनिस बलून्स जैसी चीजें इन साइट्स पर खुलेआम बेची जा रही हैं। इनमें एक वेबसाइट ऐसी भी है, जो खुद को भारत के पहले अडल्ट सेक्स स्टोर के तौर पर प्रचारित कर रही है। भारत में मशहूर एक विदेशी पॉर्नस्टार को इस साइट का ब्रैंड एंबेसडर बनाया गया है। खास बात यह है कि इस तरह की साइट्स पर कस्टमर की प्राइवेसी को बनाए रखने के लिए कई जतन किए जा रहे हैं।
ये कंपनियां बेहद सीक्रेट या डिस्क्रीट पैकिंग में इन प्रॉडक्ट्स को आपके घर तक पहुंचाने को तैयार हैं। इनमें से कुछ प्रॉडक्ट्स इंटरनेशनल हैं, जिनसे जुड़ी सभी कस्टम ड्यूटी और टैक्स चुकाने के बाद इंटरनेशनल कुरियर के जरिए इन्हें घर भेजा जा रहा है। इसके अलावा, घर पर इन्हें रिसीव करने में दिक्कत हो तो कस्टमर इन्हें बुक करने के बाद बताए गए पिकअप पॉइंट से भी हासिल कर सकते हैं।
बैचलर पार्र्टी भी
इस तरह के प्रॉडक्ट्स बेचने वाली एक वेबसाइट द्वारा कस्टमर्स के लिए बैचलर पार्टी ऑर्गेनाइज कराए जाने का दावा भी किया जा रहा है। आमतौर पर बैचलर्स पार्टी या स्टैग पार्र्टी का मतलब यह है कि दूल्हे के दोस्त शादी से पहले उसके लिए पार्टी ऑर्गनाइज करते हैं, जिसमें सभी मेल फ्रेंड्स शामिल होते हैं। हालांकि, अमेरिका और कुछ दूसरे देशों में इस तरह की पार्र्टी का मतलब छककर शराब पीना और स्ट्रिपर बुलाना भी हो चला है। ऐसी पार्टियों में अप्राकृतिक यौन संबंध होना एक आम बात है।
ऐसी पार्टी आयोजित करने का दावा करने वाली वेबसाइट पर भी इन पार्टियों की प्रतीकात्मक तस्वीरें कुछ ऐसी ही कहानी बयां करती हैं। गौरतलब है कि ऑनलाइन प्रॉस्टिट्यूशन भारत में कोई नई बात नहीं रही। ऐसे में इस तरह के आयोजन करने वाली साइट्स का सामने आना देश में एक नए किस्म के बाजार के खुलने जैसा है।
स्पेशल कंडोम
जहां तक इन सेक्स टॉयज को लेकर विवाद का सवाल है, 2007 में एक बड़े भारतीय कंडोम निर्माता ने वाइब्रेटर रिंग वाला कंडोम लांेच किया था। उस वक्त आलोचकों ने इसे सेक्स टॉयज की कैटिगरी में रखा था। बाद में मध्य प्रदेश सरकार ने इसकी बिक्री पर बैन लगा दिया था। इस बारे में जाने-माने कानूनी विशेषज्ञ एडवोकेट राजेश सिंधू कहते हैं कि अश्लीलता ऐसा टॉपिक है, जिसे कानूनी तौर पर परिभाषित कर पाना बेहद मुश्किल है। इस मुद्दे पर कानून साफ न होने की वजह से आखिरकार बात किसी प्रॉडक्ट के इस्तेमाल के पहलू पर आकर टिक जाती है। अगर किसी ने यह साबित कर दिया कि उसके वाइब्रेटर खरीदने का मकसद लस्सी बनाना है, तो कानून चाहकर भी उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
उधर, सेक्स प्रॉडक्ट्स बेचने वाली इन साइट्स को ऑपरेट करने वालों का कहना है कि अगर हमें पता चलेगा कि हमारा कोई प्रॉडक्ट भारतीय कानून के तहत गैरकानूनी है तो हम इसे नहीं बेचेंगे। हालांकि, वे यह भी कहते हैं कि जब तक हमें लगता है कि हमारा प्रॉडक्ट अश्लीलता नहीं फैला रहा या उसे इस तरह से प्रोजेक्ट नहीं गया है कि वह अश्लील लगे, तब तक इन्हें बेचने में कोई हर्ज नहीं है।
दूसरी ओर अगर ध्यान से देखा जाए तो ऑनलाइन होने वाली गैरकानूनी गतिविधियों को रोकने के लिए देश में कानून बेहद कमजोर हैं। ऑनलाइन मार्केटिंग को रेगुलेट करने के लिए कोई अलग से कानून नहीं है। आईटी एक्ट है भी तो यह उपभोक्ता के अधिकारों के संरक्षर् िकी बात नहीं करता। ऐसे में एक बेहतर और मजबूत फ्रेमवर्क की जरूरत है, जो ऑनलाइन बाजार पर निगरानी करे और उसे रेगुलेट करने में सक्षम हो।
डॉक्टरों का कहना
कानूनी तौर पर इन टॉयज को लेकर जो भी स्थिति हो, लेकिन डॉक्टर्स इनके इस्तेमाल को पूरी तरह से जायज और सेहत के लिए फायदेमंद करार देते हैं। मशहूर सेक्सॉलॉजिस्ट डॉ. प्रकाश कोठारी कहते हंैं कि आज के जमाने में किसी अनजान शख्स के साथ सुकून पाने के मुकाबले इनका इस्तेमाल कहीं बेहतर है।
उनका कहना है कि एक ऐसी उम्र भी होती है, जब कामेच्छा कंट्रोल के बाहर हो जाती है। ऐसे में इंफेक्शन और अनचाहे गर्भ का रिस्क लेने के बजाय वैकल्पिक तरीके से सुकून पाना बेहतर विकल्प है। डॉक्टर कहते हैं कि बहुत सारे लोग सेक्स के दौरान ऑर्गेजम तक पहुंचने में कामयाब नहीं होते। ऐसी हालत में भी ये टॉयज बेहद फायदेमंद हैं। वे कहते हंैं कि इस तरह की चीजों का इस्तेमाल दुनिया भर में होता है। जहां तक नैतिक तौर पर सही या गलत का सवाल है, तो इनका इस्तेमाल किसी भी तरीके से गलत नहीं है। अनैतिक तो यह होगा कि सेक्स की जरूरत महसूस होने पर रेगुलर पार्टनर के इतर किसी और से असुरक्षित यौन संबंध बनाए जाएं। बढ़ती यौन बीमारियों और जनसंख्या के मद्देजनर इनका इस्तेमाल किसी तरह से गलत नहीं है।
नेपाल है गरम बाजार
नेपाल में सेक्स टॉयज खुले बिकते हैं। राजधानी काठमांडू के प्रमुख बाजार के बीचों-बीच इसे एक सांस्कृतिक क्रांति के रूप में देखा जा सकता है। एक ऐसे समाज में जहां सेक्स के बारे में सार्वजनिक चर्चा अब भी नहीं होती है, वहीं मंजीत पौडेल और प्रवीर् िढकाल ने सेक्स से संबंधित खिलौनों की दुकान खोल रखी है और लाखों रुपए का व्यापार कर रहे हैं। दो साल पहले इन लोगों ने ‘स्वीट सीक्रेट’ नाम की दुकान खोली थी जो कि नेपाल में सेक्स खिलौनों की पहली पंजीकृत दुकान है। इस दुकान ने इतना अच्छा कारोबार दिखाया कि उन्होंने दो अन्य शहरों में भी ऐसी ही दुकानें खोल दीं और जल्दी ही वे अन्य शहरों में भी इसका विस्तार करने की योजना बना रहे हैं।
इस दुकान में सुगंधित कंडोम से लेकर बड़े आकार की गुड़िया तक करीब 150 उत्पाद बेचे जाते हैं। इनमें से ज्यादातर सामान चीन से आयातित हैं। यही नहीं, दुकान से होने वाली आमदनी भी काफी आकर्षक है। प्रवीर् िढकाल बताते हंैं कि अकेले काठमांडू की दुकान में उनकी हर महीने करीब तीन से चार लाख रुपए की बिक्री है। उनका कहना है कि जब उन्होंने दुकान खोली थी तो वे बहुत चिंतित थे कि कहीं इसका विरोध न हो और लोग उनके खिलाफ प्रदर्शन न करें। लेकिन उनके लिए ये खुशी की बात है कि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। वैसे इन लोगों को इस बारे में चिंता करने की पर्याप्त वजह भी थी क्योंकि जब वे दुकान के पंजीकरर् िके लिए अधिकारियों के पास गए तो इनसे तमाम तरह के सवाल पूछे गए। आखिरकार अधिकारी उन्हें सेक्स खिलौने बेचने के लिए एक शो रूम खोलने की इजाजत देने पर सहमत हो गए।
पंजीकरर् िके समय इन लोगों ने अपना जो मकसद बताया था, ढकाल उसे पढ़कर सुनाते हैं ः विभिन्न प्रकार के कृत्रिम पुरुष और महिला यौन अंगों को आयात करना और उन्हें बेचना। साथ ही इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि इसका समाज पर कोई बुरा असर न पड़े। ‘स्वीट सीक्रेट’ नामक दुकान हालांकि शहर के बीचोंबीच है, लेकिन ग्राहकों को एक सँकरी गली से होकर वहां जाना पड़ता है। ढकाल बताते हैं कि काठमांडू में उनकी दुकान पर रोज करीब सौ लोग आते हैं और इनमें दस प्रतिशत महिलाएं होती हैं।
महिला ग्राहकों या फिर उन ग्राहकों को जिन्हें इस बारे में बात करने में झिझक होती है, उनकी सुविधा के लिए ऑनलाइन बिक्री भी की जाती है। दुकान से एक तिहाई खरीददारी ऑनलाइन ही होती है। मंजीत पौडेल बताते हैं कि दुकान में आने वाले ग्राहक ज्यादातर 35 साल के आसपास की उम्र के होते हैं। ये लोग जो सामान खरीदते हैं उनमें कंडोम, वाइब्रेटर और गुड़ियां शामिल हैं। पौडेल का कहना है कि ज्यादातर ग्राहक ऐसे होते हैं जिनके जीवनसाथी काम-धाम के सिलसिले में बाहर रहते हैं। दुकान मालिकों के मुताबिक उनके पास अक्सर दूसरे देशों में रह रहे नेपाली युवकों के फोन और ऑनलाइन ऑर्डर आते हैं। ये लोग सेक्स खिलौनों को घर में अकेली रह रही अपनी पत्नियों के लिए खरीदते हैं। यह कहानी यहीं खत्म नहीं होती, नेपाल के संस्कृति मंत्रालय में संयुक्त सचिव रह चुके कृष्र् िश्रेष्ठ कहते हैं कि वे तो नेपाल में एक सेक्स संग्रहालय खोलना चाहते हंैं।
चीन है अव्वल
सेक्स टॉयज के अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीन सबसे बड़ा देश बनकर उभरा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक इन खिलौनों के कुल उत्पादन का 70 प्रतिशत का निर्माण अकेले चीन में किया जाता है। चीन में यौन मामलों के विशेषज्ञ और चायना सेक्सोलॉजी एसोसियेशन के उप निदेशक रह चुके मा श्यावनियान कहते हैं कि चीन श्रम आधारित उत्पादन में विश्व का अगुआ है और सेक्स टॉयज का उत्पादन इसी उद्योग का एक हिस्सा है। इसलिए यह बिल्कुल सहज है कि चीन इस मामले में अव्वल है। वहीं चीन में सेक्स टॉयज का उत्पादन करने वाले रोमियो जियांग अपने ग्राहकों के बारे में कहते हैं कि हमारे 50 प्रतिशत ग्राहक अमेरिका से और 30 प्रतिशत ग्राहक यूरोप के हैं। पिछले साल इन खिलौनों की कुल बिक्री 20 लाख से लेकर 30 लाख अमेरिकी डॉलर के बीच थी। जियांग की कंपनी विभिन्न प्रकार के सेक्स टॉयज का निर्मार् िकरती है और उन्हें 50 सेंट से लेकर 100 अमेरिकी डॉलर के दाम पर बेचती है।
सावधानी हटी, दुर्घटना घटी
अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर आपका अप्राकृतिक यौन संबंधों की ओर रूझान है और आप इसके लिए सेक्स टॉयज का इस्तेमाल कर रहे हैं तो तुरंत सावधान हो जाइए। कुछ ऐसी बातें हैं, जिनमें अगर आपने जरा सी भी असावधानी बरती तो सीधे मौत के मुंह में पहुंच जाएंगे।
अगर सेक्स टॉय प्रयोग करना जरूरी ही है और आप पक्का मन बना चुके हैं तो इसे किसी के साथ शेयर बिल्कुल न करें। कैंसर फैलाने वाले ह्युमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) से ग्रसित महिलाएं अपने पार्टनर को भी ये बीमारी दे सकती हैं अगर वे सेक्स टॉयज शेयर करती हैँ तो।
डेली मेल पर प्रकाशित एक खबर के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने रिसर्च के दौरान 12 महिलाओं को 2.2 वाइब्रेटर (सेक्स टॉय) दिए। महिलाओं के इस सेक्स टॉय के इस्तेमाल के बाद जो 9 महिलाएं एचपीवी से ग्रसित थीं के कम से कम एक वाइब्रेट में एचपीवी वायरस पाया गया।
एक टॉय दो पार्टनर यानि खतरा
इंडियाना यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन इन इंडियानापोलिस के डॉ. टेरेसा एंडरसन का कहना था कि ये एक छोटी सी रिसर्च है जिसमें ये पता लगाने की कोशिश की गई थी कि वाइब्रेटर से दो सेक्स पार्टनर्स के बीच एचपीवी वायरस ट्रांसमिट हो सकता है या नहीं।
डॉ.टेरेसा ने बताया कि यदि एक ही सेक्स टॉय को दो सेक्सुअल पार्टनर्स के बीच इस्तेमाल किया जाता है तो एचपीवी वायरस आसानी से ट्रांसमिट हो जाता है। डॉ. टेरेसा ये भी कहते हैं कि यदि सेक्स टॉय को अच्छी तरह से साफ किया जाए तो एचपीवी डीएनए वायरस के फैलने की संभावना कम हो जाती है।
यह समझना जरूरी है कि जननांग में एचपीवी सबसे ज्यादा फैलने वाला सेक्सुअली ट्रांसमिटिड इंफेक्शन है। इतना ही नहीं, सेक्सुअली एक्टिव वल्र्ड में इस संक्रमर् िको कॉमन कोल्ड के नाम से जाना जाता है।
कैंसर तक हो सकता है
चिकित्सक कहते हैं कि यूं तो एचपीवी संक्रमर् िसे बहुत ज्यादा हानि नहीं होती है लेकिन कई बार इस संक्रमर् िसे गांठ बन सकती है तो कई बार ये कैंसर का रूप भी ले सकता है। अमेरिकी सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेन्शन (सीडीसी) का मानना है कि एचपीवी संक्रमर् िसे सालाना तकरीबन 27ए000 अमेरिकंस सर्वाइकल, वल्वर, वैजाइनल, ऐनल, पेनिस, सिर और गर्दन के कैंसर से ग्रसित हो जाते हैं।
अनेक शोधकर्ता लोगों को अपने सेक्स टॉयज शेयर न करने की सलाह दे रहे हैं। हालांकि वे इस बात से भी सहमत नहीं है कि सेक्स के दौरान टॉयज का धोकर इस्तेमाल करने से कोई इंफेक्शन नहीं होगा।
उनके शोध के नतीजों में ये परिर्ािम निकले कि साफ-सफाई के बाद वाइब्रेटर्स से एचपीवी इंफेक्शन फैलने की आशंका कम हो जाती है। लेकिन
शोधकर्ताओं का कहना है कि सेक्स टॉयज पर अभी और रिसर्च होना बाकी है। सेक्स टायॅज के मैटिरीयल, डिजाइन और क्लीनिंग मैथड पर भी रिसर्च की जानी चाहिए।
पहले के शोध पर नजर
इससे पहले की गई एिक रसर्च के मुताबिक 65 फीसदी बाइसेक्सुअल महिलाएं अपने पार्टनर का सेक्स टॉयज इस्तेमाल करती हैँ। हालांकि एक रिसर्च ये भी कहती है कि जो महिला दूसरी महिला के साथ सेक्स करती है उसे एचपीवी संक्रमर् िहोने की आशंका कम रहती हैं। जबकि हालिया स्टडी कहती है कि ऐसी महिलाओं में भी एचपीवी इंफेक्शन बहुत कॉमन है। वहीं रिसर्च ये भी कहती है कि जो महिलाएं पुरूष और महिला दोनों के साथ सेक्स करती हैं उन्हें सेक्सुअली ट्रांसमिटिड इंफेक्शन का खतरा ज्यादा रहता है।
क्या है भारत में कानून
देश में सेक्स टॉयज की ब्रिकी आईपीसी के सेक्शन 292 (1) के तहत गैरकानूनी है। पहली बार कसूर साबित होने पर 2 साल की सजा, जबकि इसके बाद दोषी ठहराए जाने पर 5 साल तक की सजा का प्रावधान है। बावजूद इसके दिल्ली में पालिका बाजार और मुंबई में क्राफोर्ड मार्केट जैसी बाजारें सेक्स टॉयज के लिए काफी मशहूर हो चुकी हैं। अब तो हालात ये हैं कि हर बड़े शहर में सेक्स टॉयज का कारोबार खुलेआम होने लगा है। विभिन्न वेबसाइटों पर ऐसे टॉयज की बिक्री से संबंधी पूछताछ के लिए कांटेक्ट नंबर दिए गए हैं। अनेक वैबसाइटों पर सेक्स टॉयज के फोटो, उनकी विशेषताएं व रेट इत्यादि भी दिए गए हैं। कहने का मतलब यह है कि भारत में सेक्स टॉयज खरीदना अब बिल्कुल मुश्किल काम नहीं रहा। लेकिन ऐसे उपकरण खरीदने और उनसे अप्राकृतिक सेक्स करने का प्रचलन बढ़ता जा रहा है, लेकिन सयाने कहते हैं कि अप्राकृतिक सेक्स चाहे किसी भी रूप में और किसी के भी साथ हो, इंसान के लिए घातक है। सेक्स टॉयज किस मैटैरियल के बने होते हैं तथा इनमें कैसे लुब्रिकेंट या अन्य सामग्री डली होती हैं तथा वे शरीर के लिए कितने हानिकारक हैं, ये तो इन्हें बनाने वाले ही बता सकते हैं, लेकिन यह भी तय है कि अगर किसी को इनसे कोई नुकसान होता है तो वह किसी को बताने लायक भी नहीं होता। भारतीय संस्कृति ऐसी है कि सेक्स टॉयज की बात तो दूर, अप्राकृतिक सेक्स का जिक्र करना ही सभ्यता के खिलाफ माना जाता है।
J.K.Verma Writer
9996666769
jkverma777@gmail.com
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