Top Secrets of Kamsutra-1 : कामसूत्र के टॉप सीक्रेट्स-1 : पहले लड़कियों के लिए भी पढ़ना जरूरी था
पूरा संसार ही काम यानि सेक्स से चलता है। इसलिए जीवन में सेक्स का महत्व नकारा नहीं जा सकता। ऋषि-मुनियों ने अर्थ, धर्म और मोक्ष के साथ-साथ काम को भी मानव जीवन का लक्ष्य माना है। यदि मनुष्य की कामवासना संतुष्ट न हो तो वह मृत्यु पर्यंत अतृप्त सा महसूस करता है। काम समस्त चेतन-अचेतन क्रियाओं का केंद्र है। इसलिए इसे जाने बिना तन और मन से स्वस्थ नहीं हुआ जा सकता। कामसूत्र के रहस्य शीर्षक से जितने भी ब्लाग मैं लिख रहा हूं, उसका उद्देय आचार्य वास्त्यायन के प्राचीन ग्रंथ कामसूत्र के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डालना तो है ही, साथ में कामशास्त्र पर लिखे गए अन्य आचार्यों के ग्रंथों का उल्लेख करना भी है। मेरे किसी भी ब्लॉग का उद्देश्च किसी की कामवासना को भडक़ाना या गलत शिक्षा देने का नहीं है। मैं बस इतना ही जानता हूं कि हर व्यक्ति कामसूत्र के रहस्य समझे तथा अपने जीवन को सुखी बनाए। इस बात को निश्चित समझें कि जब तक आपको कामसूत्र की पूरी जानकारी नहीं होगी, आप गृहस्थ जीवन में सुखी नहीं रह पाएंगे। आपके जीवन में कमी, बेचैनी, तनाव और असंतुष्टि हमेशा बनी रहेगी क्योंकि सेक्स मानव-जीवन का अति महत्वपूर्ण अंग है।
आज भले ही हम कामसूत्र की पुस्तक को अपने बच्चों से छिपाकर रखते हों, लेकिन प्राचीन युग में इसे अन्य शास्त्रों की तरह हर युवक व युवती के लिए पढऩा जरूरी था। लड़कियों के लिए आचार्य वास्स्यायन ने कामसूत्र में लिखा है : हर लडक़ी को कामशास्त्र की शिक्षा अवश्य लेनी चाहिए। यह शिक्षा उसे साथ पढ़ी हुई धाय की लडक़ी, निष्कपट व्यवहार करने वाली सखी, बराबर की मौसी, बूढ़ी दासी, खेली खाई हुई भिखारिन या फिर अपने सामने रंगरेली तक कर लेनी वाली बड़ी बहन से सीखनी चाहिए। उन्हें इस कला का आचार्य मान लेना चाहिए।
पहले कन्याएं कामकला की शिक्षा लेकर एकांत में उनका अभ्यास किया करती थीं। यह बात साधारण घरों से लेकर राजमहल तक एक सी थी। महाराज विराट ने अपने पुत्री उत्तरा को नाच-गान व कामकला की शिक्षा अर्जुन से दिलवाई थी। इतिहास ऐसी अनेक कन्याओं से भरा पड़ा है, जिन्होंने कामकला की शिक्षा प्राप्त की। अनेक वैश्याओं के बारे में भी सुना जाता है कि वे कामकला में बहुत निपुण होती थीं। कहने का तात्पर्य यह है कि प्राचीन युग में कन्याओं को कामकला का ज्ञान करवाया जाता था।
वैश्याएं अपनी बेटियों को देती हैं खास प्रशिक्षण
वैश्याएं तो अपनी बेटियों को कामकला का खास प्रशिक्षण देती हैँ। इससे उन्हें भरपूर कमाई होती है। बरसों से धंधा करने वाली लउ़कियां भी ग्राहक के सामने यूं पेश होती हैं, जैसे वह अनछुई हों। ग्राहक जब उससे संभोग करने लगता है तो वे यूं हाय-तौबा मचाती हैं, जैसे पहली बार कोई उनके साथ ऐसा कर रहा हो। बेवकूफ पुरुष उसके नाटक को समझ ही नहीं पाता और बेवकूफ बन जाता है। अगर केसी पुरुष को कामशास्त्र का ज्ञान हो तो वह अच्छी तरह से उसका नाटक समझ जाता है। इसके अलावा कामशास्त्र की शिक्षा उसमें समझ पैदा करती है तथा पशु-वृति से बचाती है। उन्हें बलात्कार जैसा घिनौना काम नहीं करने देती।
बेटियों को बलात्कार से बचाया जा सकता है
आचार्य वात्स्यायन का मानना है कि अगर बेटियों को कामसूत्र की शिक्षा दी जाए तो उन्हें बलात्कार से बचाया जा सकता है। उन्हें समझाया जा सकता है कि हवस में डूबे किसी व्यक्ति के क्या हाव-भाव होते हैं, वह किस तरह का व्यवहार करता है तथा उससे कैसे बचा जा सकता है। लउ़कियां बलात्कार की भावना रखने वाले पुरुष को अच्छे से पहचान सकती हैं तथा समय रहते उससे बचने का तरीका तलाश कर सकती हैं।
गृहस्थी में आनंददायक संभोग की कती है, वह कभी सुखी नहीं रह सकता।
अधिकांश साहित्यकार कामसूत्र की अश£ीलता को गुण मानते हैं। वे रति का वर्णन में प्रयोग होने वाले शब्दों को साहित्य का दोष न मानकर गुण मानते हैं। इसी प्रकार काम आसनों का ज्ञान भी अश£ील नहीं है। यह ज्ञान स्त्री और पुरुष दोनों के लिए ही हितकारी है। महर्षि चरक, सुश्रुत व बाणभट्ट ने भी कहा है कि अन्य आसनों की बजाय स्त्री उतान आसनों से रति करने से अधिक सुखी होगी। अन्य आसनों से गर्भाधान होना कठिन है। पत्नी की आयु यदि पति से छोटी है तो मृगी के आसन से संभाग कराने से उसे कोई कष्ट नहीं होगा। इसी तरह के अनेक काम आसनों का विवरण कामसूत्र में मिलता है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि अगर किसी का गुप्तांग बड़ा या छोटा है तो वह कामसूत्र का अध्ययन करके उसी के अनुसार आनंददायक संभोग क्रिया कर सकता है। कहने की आवश्यकता नहीं है कि जिस गृहस्थी में आनंददायक संभोग की कती है, वह कभी सुखी नहीं रह सकता।
हर विवाहित जोड़ा संभोग के लिहाज से एक दूसरे का पूर्ण नहीं हो सकता। एक का गुप्तांग दूसरे के लिए सही हो, यह जरूरी नहीं है। लेकिन अगर काम आसनों का ज्ञान हो तो फिर कोई कठिनाई नहीं होती। ये आसन एजंता और एलोरा की दीवारों पर भी इसलिए खोदे गए हैं ताकि इंसान कामसूत्र की शिक्षा प्राप्त करके अपने जीवन को सुखी बना सके। और यह कोई शर्म या संकोच का विषय नहीं है। अजंता और एलोरा के अलावा भी ऐसे चित्र श्री जगन्नाथ पुरी के भुवनेश्वर मंदिर में, कोयली पर्वत पर हरसिद्धि नामक भगवती के मंदिर में, नेपाल के मंदिर में व अन्य अनेक स्थानों पर अंकित किए गए हैं। इनका उद्देश्य एक ही है : मानव जाति को सुखी करना।
पंडित कोकराज का रतिरहस्य कामसूत्र का ही अनुवाद है। आजकल के दुकानदार तो बहुत आगे बढ़ गए हैं। उन्होंने दो चार दवाईयां, दो-चार आसन, नायक-नायिकाओं के हाव-भाव जैसी बातें लिखकर किताबें छपवा ली हैं व खूब धन कमा लिया है।
कामसूत्र के रहस्यों से पर्दा उठाने के लिए ही मैं ये ब्लॉग लिख रहा हूं। मुझे पूरी उम्मीद है कि मेरे ब्लॉग पढक़र आपको कामसूत्र की संपूर्ण शिक्षा मिलेगी। आप अपने गृहस्थ जीवन में सुखी होंगे तथा जीवन आनंददायक बीतेगा।
जे.के.वर्मा, लेखक
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