Top Secrets of Kamsutra-2 : कामसूत्र के टॉप सीक्रेट्स-2 : ऐसी महिलाओं से संभोग करने में न तो लाभ है और न ही हानि

  ऐसी महिलाओं से संभोग करने में न तो लाभ है और न ही हानि

कामसूत्र में कुछ ऐसी नायिकाओं का जिक्र किया गया है, जिनके साथ संभोग करने से न तो लाभ होता है और न ही हानि। इस ब्लॉग में मैं ऐसी ही नायिकाओं के बारे में विस्तार से बताने जा रहा हूं।

1. जिनका विवाह हो चुका हो और जो संभोग का आनंद ले चुकी हों। बाद में वे किसी कारण से विधवा हो गई हों और इंद्रियों की कमजोरी के कारण किसी के साथ संभोग का सुख लूटना चाहती हों तो ऐसी काम पीडि़त महिलाओं को स्वीकार करके उनके साथ यौन-संबंध कायम करना न तो ठीक है और न ही गलत।

2. जो स्त्रियां धन कमाने के लिए अपना यौवन बेचती हों, उनके साथ यौन संबंध कायम करना न तो शास्त्रों के अनुकूल है और न ही प्रतिकूल।

3. नायिकाएं तीन प्रकार की होती हैं। पहली कन्या होती है, यानि जिसके साथ विधिपूर्वक विवाह किया जाए। ऐसी नायिक को अक्षता कहा जाता है। ऐसी कन्या के साथ यौन संबंध स्थापित करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है। दूसरी प्रकार की नायिका को पुनर्भू कहा गया है। यह दो प्रकार की होती है, एक अक्षता और दूसरी क्षता। अक्षता उसे कहते हैं जिसने यौन सुख प्राप्त न किया हो और क्षता उसे कहते हैं, जिसने यौन सुख प्राप्त कर लिया हो। पुनर्भू स्त्री कई प्रकार की हो सकती है। इनमें अक्षता के प्रकार निम्रलिखित हैं। 

० जिसका विवाह होने से पहले ही पति मर जाए।

० जो विवाह के बाद बिना संभोग किये ही छोड़ दी गई हो।

० जो बिना सुहागरात मनाये ही विधवा हो गई हो।   

क्षता स्त्री निम्रलिखित प्रकार से हो सकती है =

० जिसने विवाह से पहले ही संभोग कर लिया हो। 

० जो विवाह के बाद अपने पति और बच्चों को छोडक़र किसी और के साथ रहने लगे।

० जो विधवा होकर किसी और के साथ संभोग सुख प्राप्त करती हो।

तीसरी प्रकार की नायिका वैश्या होती है। इसके बारे में अधिक बताने की आवश्यकता नहीं है। इतना ही कह देना काफी है कि जो धन के लिए स्वयं को प्रस्तुत करती है, उसे वैश्या कहा जाता है। 

चौथी नायिका = कुछ अन्य प्रकार की नायिकायें भी बताई गई हैं। जिसे हम चौथी नायिका कह सकते हैं। इस प्रकार की नायिका अपने पति के साथ-साथ दूसरों के पति के साथ भी संबंध रखती है। आचार्य वात्स्यायन कहते हैं कि जब यह पता चल जाए कि पराई स्त्री व्यभिचारिणी है व स्वतंत्र है तो उसे नायिका बनाकर उससे संभोग कर सकता है। इससे धर्म की हानि नहीं होती। 

ऐसी स्त्री को वैश्या समझना चाहिए : जो स्त्री दूसरों से भी अनेक बार संभोग कर चुकी हो, ऐसी गिरी हुई स्त्री चाहे ऊंचे कुल से ही क्यों न हो, उसे वैश्या के समान मानना चाहिए। ऐसी स्त्री के साथ संंभोग करने से धर्म की हानि नहीं होती। आचार्य गोणिकापुत्र के अनुसार खराब को और खराब करने में कोई दोष नहीं है। ऐसी स्त्री किसी भी वर्ण की हो सकती है। 

अक्षतयोनि पुनर्भू से संभोग गलत नहीं है : आचार्य वात्स्यायन कहते हैं कि जो क्षतयोनि पुनर्भू है, यानि जिसने पहले पति से संभोग किया और अब किसी और से संबंध जोड़े हुए है, यानि जो यौन सुख के लिए पति का धर छोडक़र दूसरे के घर में रह रही है, ऐसी पथभ्रष्ट स्त्री के साथ संभोग करना धर्म के खिलाफ नहीं है। 

परस्त्री से संबंध इसलिए भी रखना चाहिए :

० यदि उसका पति बहुत धनवान और प्रतिष्ठित है तथा तुम्हारे शत्रु के साथ उसका गहरा संबंध है, तो उस स्त्री से संबंध बना लेना चाहिए। इस तरह वह उस स्त्री पर प्रेम का दबाव बनाकर उसे विवश कर सकेगा कि वह अपने पति को इस बात के लिए मनाये कि वह उसके शत्रु से संबंध तोड़ ले। 

० जिस पुरुष के साथ पहले मित्रता रही हो और बाद में शत्रुता हो गई हो, तो उसकी पत्नी से सबंध जोड़ लेना चाहिए। इससे वह स्त्री अपने पति को समझा-बुझाकर दुश्मनी को समाप्त करवा देगी। 

० किसी दुश्मन से दुश्मनी निकालने के लिए भी उसकी पत्नी से संबंध स्थापित किया जा सकता है ताकि बाद में उसके साथ मिलकर उसकी हत्या की जा सके। 

० अगर आप बेरोजगार या धनहीन हैं तो भी किसी की काम-पीडि़त स्त्री से इसलिए भी संबंध जोड़ा जा सकता है। मनु महाराज ने भी कहा है कि बूढ़ी मां, पतिव्रता पत्नी तथा गोद के बच्चे को पालने के लिए यदि सौ बुरे काम भी करने पड़े तो इसमें कोई बुराई नहीं है। 

० ऐसी स्त्री से भी संबंध बना लेने चाहिएं जो आपके गूढ़ रहस्य जानती हो। जिससे यूं लगता हो कि यह आपके रहस्य दूसरों को बता सकती है। स्वयं को विनाश से बचाने के लिए अगर  परस्त्री से संबंध जोड़ा जाए तो यह धर्म के खिलाफ नहीं है। 

० उस स्थिति में भी परस्त्री से संबंध जोड़ लेने चाहिएं, जब आपको ऐसा लगता हो कि वह आपको किसी झूठे मुकदमें में फंसा देगी और आपका भविष्य खराब कर देगी। 

० ऐसी स्त्री से भी संबंध जोड़ लेना चाहिए, जिसका पति अत्यंत प्रभावशाली हो और पत्नी के कहने पर चलता हो। ऐसी स्त्री अगर संबंध बनाने पर दबाव डाले तो संबंध बना लेना चाहिए। वर्ना वह स्त्री आपको फंसा सकती है। 

० इसने मेरी पत्नी को भ्रष्ट कर रखा है। मैं इसकी पत्नी को भ्रष्ट कर दूंगा। यह सोचकर भी परस्त्री से संबंध जोडऩा बुरा नहीं है। 

० राजा ने अगर मुझे किसी स्त्री के भेद लेने के लिए नियुक्त किया है और उससे संबंध जोड़े बिना वह अपने भेद नहीं उगलेगी तो उस स्त्री से संबंध जोड़ लेने चाहिएं। 

० कुछ खास कारणों से मुझे किसी स्त्री से मिलना जरूरी है और वह किसी और के काबू में है। उससे संबंध बनाए बिना मनचाही स्त्री से नहीं मिला जा सकता तो इस संबंध में भी परस्त्री से संबंध बनाना अनुचित नहीं है। 

० मैं गरीब हूं और एक लडक़ी से प्यार करता हूं और यह लडक़ी एक धनवान स्त्री के यहां काम करती है। अगर मैं इस धनवान स्त्री से संबंध जोडक़र इसे खुश कर दूं तो वह मुझे धन भी देगी और मेरी इच्छा भी पूरी करवा देगी। यह सोचकर भी परस्त्री से संबंध जोडऩा बुरा नहीं है। 

० मेरा जानी-दुश्मन इसके पति का दोस्त बन गया है। दोनों साथ ही खाते-पीते हैं। इसलिए मैं इस स्त्री से संबंध जोडक़र इसके माध्यम से अपने दुश्मन के खाने में जहर मिलवा दूंगा। इस विचार से भी परस्त्री से संबंध जोडऩा गलत नहीं है। 

पांचवीं प्रकार की नायिका : पांचवीं प्रकार की नायिका एक ऐसी विधवा होती है, जो राजा या राजदरबार के महत्वपूर्ण लोगों के साथ संबंध बनाती है। इसका चाल-चलन बड़ा ही गुप्त होता है। ऐसी स्त्री के साथ अगर संबंध बनाने का मौका मिले तो बना लेने चाहिएं क्योंकि इससे राजदरबार के काम आसानी से करवाए जा सकते हैं। 

छठी प्रकार की नायिका : छठी प्रकार की नायिका वह होती है, जो पहले तो राजदरबार में काम करती हो तथा बाद में जोगन बन गई हो। ऐसी महिलाएं बहुत ही काम की होती हैं। इनके साथ सबंध जोडऩा हमेशा फायदे का सौदा साबित होता है क्योंकि इसके माध्यम से राजदरबार के कई काम करवाये जा सकते हैं।

सातवीं प्रकार की नायिका : आचार्य घोटकमुख कहते हैं कि सातवीं प्रकार की नायिक वैश्या की उस बेटी को कहा जाता है जो जवानी में प्रवेश करने के बाद भी बिल्कुल न बिगउ़ी हो। जिसने किसी पुरुष से संभोग न किया हो। किसी दासी की अगर ऐसी पुत्री हो तो उसे भी सातवीं प्रकार की नायिका कहा जा सकता है। ऐसी लडक़ी अगर मिल जाए तो उसके साथ भी संबंध जोड़ा जा सकता है। क्योंकि समय आने पर इनसे वैश्यावृति ही करवाई जाती है। 

नपुंसकों से संबंध : कुछ अन्य आचार्यों का मत है कि जो न स्त्री हैं और न ही पुरुष, ऐसे नपुंसकों से भी मुख-मैथुन जैसी क्रियाओं से यौन सुख लिया जा सकता है। लेकिन अनेक आचार्य इसके खिलाफ हैं। 

अगले ब्लॉग में मैं आपको बताऊंगा कि किस प्रकार की स्त्रियां से भूलकर भी यौन संबंध स्थापित नहीं करने चाहिएं। 

J.K.Verma Writer

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