Top Secrets of Kamsutra-6 : कामसूत्र के टॉप सीक्रेट्स-6 : कठिन से कठिन स्त्री को सिद्ध करने में सहायक लोग
कठिन से कठिन स्त्री को सिद्ध करने में सहायक लोग
कामसूत्र में आचार्य वात्स्यायन ने विस्तार से दूती कर्म का उल्लेख किया है। कामशास्त्र में सहायक उन लोगों को कहा गया है, जो जान-पहचान से लेकर यौन संबंधों तक पहुंच जाने वाले नायक-नायिकाओं के बीच एक कड़ी का काम करते हैं। ऐसे लोग विलासी पुरुषों के लिए बहुत काम के होते हैं। यह सहायक लोग तीन प्रकार के होते हैं।
1. स्नेह के कारण।
2. गुणों के कारण
3. जाति-विशेष के कारण।
आईए सबसे पहले जानते हैं कि स्नेह के कारण कैसे लोग सहायक की भूमिका निभाते हैं।
1. जो एक साथ धूल में खेलकर बड़े हुए हों।
2. जिसकी समय पर सहायता की गई हो।
3. जिनमें एक जैसे गुण या अवगुण हों।
4. जो एक साथ पढ़ते हों।
5. जो विश्वासपात्र हों। राज को राज रखने वाला होने के कारण प्रिय हों।
6. जो गुप्त से गुप्त भेद जानता हो।
7. जो एक जैसे शौक या व्यसन रखते हों।
8. जो ऐसी दाई का बेटा हो, जिसका नायक ने दूध पीया हो।
9. जो एक ही गांव में रहने के कारण लंगोटिये मित्र बन गए हों।
गुणों से सहायक :-
1. जिसके साथ बाप-दादा के समय से मित्रता चली आ रही हो।
2. जो झूठ न बोलता हो। जैसा देखता हो, वैसा ही बताता हो।
3. जो घर की स्त्रियों को बुरी नजर से न देखता हो।
4. जो धोखेबाज न हो। मित्र के लिए सब कुछ कर सकता हो।
5. जो धन के लालच में आकर मित्र का बुरा न सोचता हो।
6. जिसे कोई दूसरा बहका न सके।
7. जो छिपी हुई बात किसी से न कहता हो।
जाति से सहायक :
1. धोबी-धोबिन : ये धोने के लिए मैले कपड़े लेने, उन्हें धोकर लौटानेद के बहाने एक दूसरेे के घरों में आसानी से घुस जाते हैं। इस तरह से ये नायक-नायिकाओं के संदेश एक दूसरे तक पहुंचा देते हैं।
2. नाई-नाईन : नाई हजामत बनाने के लिए व नाईन सिर आदि बांधने के लिए एक दूसरे के धरों में आते-जाते रहते हैं। इस तरह ये नायक-नायिकाओं के संदेश एक दूसरे को पहुंचा सकते हैं।
3. दूध देने व पशु चराने वाले : ये लोग पशु चराने व वापिस लाने के लिए लोगों के घरों में आते-जाते रहते हैं। या फिर ये दूध देने के लिए घरों में जाते रहते हैं। इस तरह ये आसानी से यह काम कर सकते हैं।
4. माली-मालिन : ये फूल, मालाएं व गजरे आदि देने के लिए घरों में जाते रहते हैं। ये नायक-नायिकाओं के संदेश आसानी से पहुंचा सकते हैं।
5. तमोली-तमोलिन : ये पान खिलाने के लिए घरों में जाते रहते हैं। इसलिए ये आसानी से नायक-नायिकाओं के संदेश एक दूसरे तक पहुंचा सकते हैं।
6. सुनार : ये जेवर दिखाने या सोने -चांदी की अन्य वस्तुएं दिखाने के लिए दूसरों के घरों में जाते रहते हैं। इसलिए ये आसानी से नायक-नायिकाओं के संदेश एक दूसरे तक पहुंचा सकते हैं।
7. गंधी : ये लोग इत्र इत्यादि बेचने के लिए धरों में जाते रहते हैं तथा इस तरह ये नायक-नायिकाओं के प्रेम-संदेश देने में भी कामयाब हो जाते हैं।
8. कलाल : ये शराब पहुंचाने का काम करते हैं। शराब के साथ-साथ ये प्रेम संदेश भी पहुंचा सकते हैं।
9. भिखारी-भिखारिन : ये भीख मांगने के बहाने आसानी से एक से दूसरे घर में जाते रहते हैं। इस प्रकार ये नायक-नायिकाओं के प्रेम संदेश भी पहुंचाते रहते हैं।
ऊपर दिए हुए सभी प्रकार के सहायक समय पडऩे पर दूती कर्म यानि सहायक का काम कर सकते हैं। लेकिन इनमें कुछ विशेष गुणों का होना आवश्यक है।
० ये लोग नायक और नायिका दोनों के प्रति उदारदिल होने चाहिएं।
० जो दोनों के कहे काम को चुपचाप कर देते हों।
० जो नायक-नायिका का काम करने के लिए हर पल उतावला रहता हो और ऐसे में स्वयं की ओर ध्यान न देता हो।
० जिस पर नायिका विशेष तौर से विश्वास करती हो।
० जो बुद्धिमान होने के साथ-साथ बोलने में भी चतुर हो।
० जो अपना काम निडरतापूर्वक करने में दक्ष हो।
० जो ईशारों और चेष्ठाओं को समझाता हो।
० जो समय देखकर उत्साहित करने की कला जानता हो7
० जिसमें संकट और संघर्ष के समय तत्काल निर्णय लेने की क्षमता हो।
० जो कार्य पूरा कर लेने के लिए तत्काल उपाय सोच लेता हो।
० जो थोड़ा समझाने पर भी बहुत कुछ समझ जाता हो।
आचार्य वात्स्यायन कहते हैं कि जिसमें धर्म, अर्थ और काम की प्राप्ति करने वालों के गुण हों, जिसके पास अच्छे से अच्छे सहायक हों, जो अपने कर्म में विश्वास करता हो, जो नायिका के सभी भावों को जानता हो, ऐसा पुरुष कठिन से कठिन स्त्री को भी बिना परिश्रम के प्राप्त सिद्ध सकता है।
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