Top Secrets of Kamsutra-3 : कामसूत्र के टॉप सीक्रेट्स-3 : ऐसी स्त्रियों से भूलकर भी न करें संभोग

ऐसी स्त्रियों से भूलकर भी न करें संभोग

आचार्य वात्स्यायन के अनुसार कुछ  ऐसी प्रकार की स्त्रियां होती हैं, जिनके साथ भूलकर भी संभोग नहीं करना चाहिए। इससे धर्म की हानि तो होती ही है, मन और स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ सकता है और सामाजिक जीवन में भी पतन होता है। इन स्त्रियों का विवरण इस प्रकार है :-

1. जिन स्त्रियों में कोढ़ जैसा कोई भयानक रोग हो, उसके साथ यौन संबंध स्थापित करने से वह रोग लग जाने की पूरी-पूरी आशंका होती है। ऐसी स्त्रियों से सदा दूर ही रहना चाहिए।

2. जो स्त्रियां पागल या मानसिक रूप से विक्ष्प्ति हों। ऐसी स्त्रियां किसी भी समय कोई भी हरकत कर सकती हैं। इससे किसी भी प्रकार की क्षति पहुंच सकती है। 

3. जो स्त्रियां अपने कुकर्मों के कारण अपनी जाति, धर्म या समाज में गिर गई हों, उसके साथ संभोग करने से पुरुष का पतन होता है।

4. जो स्त्री लज्जाहीन हो, बात-बात पर लज्जित करती हो, ऐसी स्त्री से दूर ही रहना चाहिए। ऐसी स्त्री कभी भी आपकी पोल खोल सकती है और आपको बहुत से लोगों के सामने लज्जित कर सकती है। 

5. जो स्त्री ढ़ली हुई उम्र की हो। ऐसी स्त्री से संभोग करने से तेज और आयु दोनों की हानि होती है।

6. जो स्त्री बहुत ज्यादा गौरी या खूबसूरत हो, ऐसी स्त्री के साथ भी संभोग नहीं करना चाहिए। ऐसी स्त्री आपको नीचा दिखा सकती है और हीन-भावना का अनुभव करवा सकती है। 

7. ऐसी स्त्री से भी संभोग नहीं करना चाहिए, जो बहुत अधिक काली हो या फिर बहुत बदसूरत हो। ऐसी स्त्री से संभोग करने से मन में वितृष्णा पैदा हो सकती है और संभोग का वास्तविक सुख नहीं मिल सकता। 

8. जिस स्त्री के मुंह या गुप्तांगों से बदबू आती हो, उससे भी संभोग नहीं करना चाहिए। ऐसी स्त्री से संभोग आनंददायक नहीं हो सकता।

9. जो स्त्री भाई की, बहन की, बेेटे की या बेटी की ससुराल की तरफ से हो, उसके साथ भी कभी भूलकर यौन संबंध नहीं जोडऩे चाहिएं। इससे समाज में मान-मर्यादा का नाश होता है।

10. जो स्त्री पत्नी की सहेली हो, उससे भी यौन संबंध स्थापित नहीं करना चाहिए। इससे अपनी ही गृहस्थी का नाश होता है।

11. ऐसी स्त्री, जिसने किसी पंथ में दीक्षा ली हो और सन्यासिनी बन गई हो, उसके साथ भी यौन संबंध नहीं जोडऩा चाहिए। इससे धर्म की हानि होती है।

12. अपने सहपाठी और अपने सहकर्मी की पत्नी से भी दूर रहना चाहिए। इससे आपसी संबंधों का नाश होता है।

13. गुरु को अपने शिष्य की पत्नी से, भाई को अपने भाई की पत्नी दूर रहना चाहिए क्योंकि ये ग्रहण करने लायक नहीं हैं। इससे धर्म का नाश होता है।

14. मित्र की पत्नी से भी कभी यौन संबंध कायम नहीं करने चाहिएं। इससे बैर उत्पन्न होता है तथा मित्रता का नाश होता है। 

मनुस्मृति में कहा गया है -अपने संबंधी की स्त्री में, कुमारी कन्या में, अद्यूत स्त्री में, मित्र व पुत्र की स्त्री में वीर्यपात करना गुरु पत्नी से संभोग के समान है। इससे भारी पाप लगता है।

15. वेदपाठी की स्त्री से भी दूर रहना चाहिए क्योंकि वह धधकती हुई ज्वाला के समान होती है।

16. जिसके साथ खून का या कुटुंब का रिश्ता हो, उसके साथ भी कभी यौन संबंध नहीं बनाने चाहिएं क्योंकि इससे व्यक्ति अपनी ही नजर में गिर जाता है।

17. राजा की पत्नी से भी संभोग नहीं करना चाहिए। इससे जान का खतरा उत्पन्न हो जाता है। 

ऐसी स्त्रियों को छोडक़र बाकी के साथ संभोग करना शास्त्र, धर्म या मर्यादाओं के खिलाफ नहीं है।

वैधक और धर्मशास्त्र की नजरों में :

० आचार्य चरक के अनुसार - अत्यंत छोटी उम्र की, अधिक बड़ी उम्र की, लंबे समय से रोगपीडि़त और अन्य किसी भी प्रकार के विकार से युक्त स्त्री से कभी यौन संबंध स्थापित नहीं करना चाहिए। 

सुश्रुत संहिता के अनुसार - ज्यादा बूढ़ी, लंबे समय से बीमार और विकारयुक्त स्त्री में गर्भाधान नहीं करना चाहिए।

भावप्रकाश के अनुसार - रजस्वला, गुप्ता रोगिणी, बूढ़ी, निकम्मी, मैली और गर्भवती स्त्री के साथ संभोग करने से पुरुष में कई प्रकार के दोष पैदा हो जाते हैं।

किसी भी संप्रदाय की सन्यासिनी, गुरु पत्नी, अपने गौत्र की तथा बूढ़ी स्त्री के साथ कभी भी संभोग नहीं करना चाहिए। इसके अलावा पवित्र त्यौहारों के अवसर पर व सायंकाल के समय संभोग करने से आयु की क्षति होती है।

ब्राभव्य का विचार : जिसने पांच पुरुषों के साथ संभोग कर लिया, वह परहेज के लायक नहीं है। उसे व्याभिचारिणी मानना चाहिए। उसके साथ कोई भी सहवास कर सकता है।

इस बारे में ऋषि पराशर ने भी कहा है : जिसने पांच खसम कर लिए, वह तो कहीं भी गिरवी रखी जा सकती है।

इस संबंध में यह बात अवश्य ही सोचनीय है कि द्रोपदी के भी तो पांच पति थे। तो क्या उसे व्याभिचारिणी कहा जाएगा? इसका स्पष्ट उत्तर है : नहीं। इसके दो कारण हैं। पहला कारण तो ये है कि द्रोपदी के माता-पिता ने उसे धर्मानुसार पांचों पांडवों को दिया था। इसलिए वह दूसरों द्वारा भोगी जाने के लिए नहीं है। दूसरा कारण यह है कि द्रोपदी के पिता द्रुपद ने भगवान वेद व्यास से यह बात जान ली थी कि पांचों पांडव वास्तव में पांच इंद्र थे तथा द्रोपदी स्वर्ग की शोभा थी। इस कारण वह पांचों के प्राप्त करने के लायक थी।

आचार्य गोणिकापुत्र के अनुसार :- जिसने पांच खसम कर लिए हों, वह प्राप्त करने के लायक है, यह बात हर स्त्री पर लागू नहीं होती। वे कहते हैं कि कुछ विशेष स्त्रियां ऐसी भी होती हैं जिन्होंने चाहे पांच खसम कर लिए हों, फिर भी उनसे दूर रहना चाहिए। ये विशेष स्त्रियां इस प्रकार हैं :-

1. जिस स्त्री के साथ रक्त का संबंध हो। जैसे मां, बहन, बेटी इत्यादि।

2. जिस स्त्री के साथ विद्या का संबंध हो, जैसे सहपाठिनी, शिष्या, अध्यापिका आदि।

3. जिस स्त्री के साथ योनि का संबंध हो, यानि पारिवारिक संबंध हो, जैसे पुत्रवधू व भाई की पत्नी इत्यादि।

4. जो पत्नी की प्रिय सखी हो। 

5. वेदों का अध्ययन करने वाले की पत्नी, हवन-यज्ञ करने वाले ब्राöण की पत्नी तथा राजा की रानी।

ऐसी स्त्रियों से कभी भी यौन संबंध स्थापित नहीं करने चाहिएं, चाहे वे कितनी भी कुलटा क्यों न हों। ऐसी स्त्रियों से गलत संबंध रखने से धर्म व परिवार का नाश होता है। पाप की प्राप्ति होती है तथा जान जाने की भी संभावना रहती है। 

J.K.Verma Writer

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